Story for kids in hindi : Jadui Ghoda (जादुई घोड़ा) ki Kahani | hindi story | oneanonlyvihat



Story For Kids In Hindi : Jadui Ghoda



हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब लोग उम्मीद करता हूं कि हर बार की तरह इस बार भी आप सब ठीक ही होंगे! हर बार की तरह आज भी मैं आपके लिए एक बहुत ही अच्छी और रोमांच से भरी कहानी Kahani लेकर हाजिर हु ! आज की हमारी कहानी है जादुई घोड़े Jadui Ghoda  के बारे में, तो चलिए शुरू करते हैं; ( hindi story )

Jadui Ghoda : Story for kids in hindi with moral

(Kahani)

Jadui Ghoda : Story for Kids in hindi



Story for kids in hindi (hindi kahani) Jadui Ghoda : किसी दूर एक गांव में राजू नाम का एक लड़का रहता था! राजू बहुत ही होशियार और चालक लड़का था! राजू पढ़ने में तो होशियार था ही साथ ही वह अपने पापा को खेत काम में भी मदद करता था! राजू के गांव में एक तेजा नाम का राउडी रहता था, वह  लोगों को डरा धमका कर उनसे पैसे पड़ाता था! लोग उससे बहुत डरते थे, इसी बात का वह फायदा उठाता था.

एक दिन राजू के पापा ने राजू को पास के गांव से एक घोड़ा खरीद कर लेकर आने को कहा! राजू जब घोड़ा खरीद के अपने घर को वापस आ रहा था तब रास्ते में उसने सामने से तेजा को अपनी तरफ आते हुए देखा! तेजा को आता हुआ देख राजू ने घोड़ा खरीदने के बाद जो पैसे बचे थे उसे अपनी कमीज में छुपाने लगा और उसमें से एक सोने का सिक्का घोड़े के गले में बांध दिया!


तेजा राजू के पास आकर बोला "तेरे पास जितने भी पैसे हैं वह मुझे दे दे वरना मैं तुझे बहुत मारूंगा!"

तेजा की यह बात सुनकर राजू ने कहा “मेरे पास जितने भी पैसे थे उससे मैंने यह घोड़ा खरीद लिया है लेकिन यह कोई ऐसा वैसा घोड़ा नहीं है यह जब भी हिनहिना ता है तब एक सोने का सिक्का गिरता है!, तभी घोड़े ने हिनहिना या और उसके गले में बांधा हुआ सोने का सिक्का नीचे गिर गया! यह देख कर तेजा को बहुत ही आश्चर्य हुआ उसने राजू से वह घोड़ा छीन लिया और कहा कि अगर किसी को भी बताया तो मैं तुझे जान से मार डालूंगा इतना बता कर वह घोड़े को लेकर अपने घर आ गया

उस पूरे दिन में घोड़े ने एक बार भी नहीं हिनहिना या उसके अगले दिन घोड़े ने दो बार जोर से हिन हिना या! लेकिन घोड़े के हिनहिना ने से एक भी सोने का सिक्का जमीन पर नहीं गिरा, यह देखकर तेजा को बहुत ही गुस्सा आया वह घोड़े को साथ लेकर राजू के घर की तरफ चल पड़ा!

दूर से तेजा को अपने घर के तरफ आता देख राजू ने अपने पापा से कहा कि “ मैंने आपसे कहा था ना कि अपना घोड़ा अपने घर वापस आएगा!” फिर उसने अपने पापा के कान में कहा कि अब आप जैसा मैं बोलता हूं वैसा ही करना! इतना बता कर वह अपने घर के बाजू में एक पेड़ के पीछे छुप गया

तेजा ने राजू के पापा से आकर कहा कि “बुलाओ अपने बेटे को, उसने मुझे ठगा है”

इस बात पर राजू के पापा बोले “भाई, थोड़ी धीरज रखो मैं अभी राजू को बुलाता हूं!”

इतना बोल कर उन्होंने अपने कुत्ते से कहा कि “ जाओ सोनू बेटा खेत में जाकर राजू को बुला कर लेकर आओ”

राजू के पापा की बात सुनकर सोनू तुरंत ही खेत की ओर चल पड़ा! यह सब देख तेजा को बहुत ही आश्चर्य हुआ! उसे आश्चर्य में देख राजू के पापा ने उसे बताया कि “ यह हमारा कुत्ता सोनू है और हमारा बताया हुआ हर काम करता है!”

इतने मैं सोनू राजू को साथ लेकर आया!

राजू को देखकर तेजा ने कहा कि “ तुमने मुझे ठगा है इसीलिए मैं यह घोड़ा यही छोड़कर और तुम्हारे कुत्ते को अपने साथ लेकर जा रहा हूं!”

इतना कहकर तेजा ने घोड़े को वहीं छोड़ दिया और कुत्ते को अपने साथ लेकर घर की तरफ निकल पड़ा! घर पहुंचने पर उसने अपनी बीवी को बताया कि यह कुत्ता आज से हमारा सारा काम करेगा! और मैं अभी बाहर जा रहा हूं अगर घर पर कोई मेहमान आए तो इस कुत्ते को मुझे बुलाने के लिए भेज देना”

इतनी बात बताकर वह गांव की ओर निकल पड़ा! दो दिन बाद तेजा के घर कोई मेहमान आया तो तेजा की बीवी ने सोनू से तेजा को बुलाकर लाने को कहा!

श्याम होने पर तेजा घर वापस आया लेकिन सोनू घर पर लौट कर वापस नहीं आया था! इस बार भी तेजा को बहुत गुस्सा आया और वह फिर से राजू के घर की ओर चल पड़ा! जब वह राजू के घर पहुंचा तो उसने देखा कि राजू और सोनू साथ में खेल रहा है! यह देख कर वह गुस्से से लाल पीला हो गया! उसने राजू से कहा कि “तुमने मुझे हर बार ठगा है, अब मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा” इतना बोल कर उसने राजू को एक बोरे में बांध लिया है और जंगल की ओर निकल पड़ा, रास्ते में उसे बोरे के वजन के कारण कड़ी प्यास लगी थी! तभी उसने थोड़ी दूर एक तालाब देखा! तो उसने बोरे को नीचे रखा और पानी पीने के लिए तालाब की ओर चल पड़ा!

तभी वहां से भेड़ बकरियों को चराता हुआ एक चरवाहा वहां से गुजरा! राजू ने बोरे के अंदर से चरवाहे के चलने की आहट सुनकर चिल्लाने लगा “नहीं मुझे लड्डू नहीं चाहिए, मुझे मीठा नहीं पसंद, मुझे छोड़ दो”

बोरे में से आ रही आवाज को सुनकर चरवाहा बोरे के पास गया और पूछा “कौन हो तुम”

इस पर राजू ने जवाब दिया “मेरा नाम राजू है! लेकिन एक सेठ जिनके कोई बच्चे नहीं है वह मुझे जबरदस्ती अपने घर ले जा रहे हैं, उनके घर में खाने के लिए बहुत सारी मिठाइयां और लड्डू है लेकिन मुझे उनके घर नहीं जाना अगर तुम्हें जाना हो तो इस बारे में बैठ जाओ और मुझे बाहर निकालो”

राजू की बात सुनकर चरवाहा उसकी बातों मैं आ गया और राजू को बोरे में से बाहर निकाल कर वह खुद उसमें बैठ गया!

इतने में तेजा पानी पीकर वापस आ गया और बोरे को लेकर एक गुफा मैं चला गया! उसने बोरे को गुफा में रख दिया! और बाहर से गुफा को बंद कर दिया!

राजू भी उसका पीछा करते हुए गुफा तक पहुंच गया! तेजा के जाने के बाद वह उस गुफा में गया और चरवाहे को बाहर निकाला और उसे अपनी मदद करने को कहा! चरवाहा भी उसकी मदद के लिए तैयार हो गया

तेजा जब अपने घर वापस जा रहा था तब रास्ते में उसने राजू को भेड़ बकरियों के साथ दिखा! उसे बहुत ही आश्चर्य हुआ! उसने राजू से पूछा कि “तुम यहां कैसे, तुम्हें तो मैंने गुफा में बंद कर दिया था!”

इस पर राजू घबराने का नाटक करते हुए बोला की उस गुफा में बहुत ही सोना चांदी और हीरे मोती का खजाना है! और यह भेड़ बकरियां उसकी रक्षा कर रही थी! तो मैंने सोचा कि पहले इनको कहीं दूर छोड़ कर वापस जाउ!

राजू की यह बात सुनकर तेजा के मन में लालच और भी बढ़ गई और वह दौड़ते हुए उस गुफा में चला गया और सोना चांदी ढूंढने लगा! तभी राजू ने चरवाहे के साथ मिलकर गुफा का दरवाजा बंद कर दिया!और चरवाहे को गुड बाय बोल कर अपने घर की ओर चल पड़ा!


सीख ( Moral )



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अगर बुद्धि से काम लिया जाए तो किसी भी कठिन और विपरीत परिस्थिति से भी हम बहुत ही आसानी से मुक्ति पा सकते हैं

तो दोस्तों, आपको आज की हमारी यह जादुई घोड़े Jadui Ghoda वाली hindi story कैसी लगी हमें कमेंट कर के जरूर बताएं,हमारी कहानी Kahani को पढ़ने के लिए आप का बहुत-बहुत धन्यवाद...


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